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Showing posts from January, 2025
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कुंडली के बारह भाव होते हैं और कुल बारह राशियों हैं। हर एक राशि 30 अंश की होती हैं। किसी जातक के जन्म समय के अनुसार उनकी कुंडली का लग्न कौनसी राशि का और कितने अंश से हैं ये नक्की होता हैं। उस वक्त सभी ग्रहों का अलग अलग राशि में भ्रमण कितने अंशो से हैं उस पर कोई भी ग्रह का चलित में भावपरिवर्तन नक्की होता हैं। जब कोई ग्रह या तो बहोत कम अंश का हो या तो बहोत ज्यादा अंश से हो तब वो ग्रहों का चलित में भाव परिवर्तन होने की संभावना बढ़ जाती हैं। इसी तरह जब लग्न के अंश बहोत कम या ज्यादा हो तब ऐसा होता हैं। उदाहरण के तौर पे देखें तो किसी जातक का लग्न 00.48 अंश का हैं और लग्न कुंडली में लग्न भाव में गुरु 29अंश और राहु 20 अंश से हैं तो वो दोनों चलित में अगले भाव में यानी दूसरे भाव धन भाव में चले जायेंगे और गुरु राहु का फल उस भाव के लिए मिलेगा। लेकिन सिर्फ उस भाव का फल देगा, राशि वो ही रहेगी, वो नहीं बदलेगी। और ना तो वो ग्रहों की दृस्टि बदलेगी, वो तो लग्न कुंडली के मुताबिक ही रहेगी। मानो की किसी की कुंडली में नौ ग्रहों में से पांच ग्रह चलित में आगे या पीछे के भाव...

जन्म कुंडली क्या है और यह हमारे जीवन में किस प्रकार उपयोगी है?

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जन्म कुंडली क्या है और यह हमारे जीवन में किस प्रकार उपयोगी है? जन्म कुंडली, जिसे "जन्म पत्री" भी कहा जाता है, एक खगोलीय चार्ट होती है जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में स्थित ग्रहों, नक्षत्रों, और राशियों की स्थिति का विवरण देती है। इसे जन्म के समय, तिथि, समय और स्थान के आधार पर तैयार किया जाता है। जब कोई व्यक्ति जन्म लेता है, तो उस समय पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति जो आकाश में होती है, वह व्यक्ति की जन्म कुंडली में अंकित हो जाती है। यह कुंडली व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी देती है, जैसे कि उसका व्यक्तित्व, भविष्य, संभावित अवसर, चुनौतियाँ, रिश्ते, करियर, और अन्य महत्वपूर्ण बातें। जन्म कुंडली कैसे बनाई जाती है? जन्म कुंडली बनाने के लिए तीन मुख्य बातें महत्वपूर्ण होती हैं: जन्म का समय – सही समय का पता होना बहुत जरूरी है क्योंकि ग्रहों की स्थिति समय के अनुसार बदलती रहती है। यदि समय सही नहीं होगा तो कुंडली गलत बनेगी। जन्म की तारीख – व्यक्ति का जन्म जिस दिन हुआ है, उस दिन का विवरण भी सही होना चाहिए। जन्म स्थान – जन्म स्थ...