कुंडली के बारह भाव होते हैं और कुल बारह राशियों हैं। हर एक राशि 30 अंश की होती हैं। किसी जातक के जन्म समय के अनुसार उनकी कुंडली का लग्न कौनसी राशि का और कितने अंश से हैं ये नक्की होता हैं।

उस वक्त सभी ग्रहों का अलग अलग राशि में भ्रमण कितने अंशो से हैं उस पर कोई भी ग्रह का चलित में भावपरिवर्तन नक्की होता हैं। जब कोई ग्रह या तो बहोत कम अंश का हो या तो बहोत ज्यादा अंश से हो तब वो ग्रहों का चलित में भाव परिवर्तन होने की संभावना बढ़ जाती हैं। इसी तरह जब लग्न के अंश बहोत कम या ज्यादा हो तब ऐसा होता हैं।

उदाहरण के तौर पे देखें तो किसी जातक का लग्न 00.48 अंश का हैं और लग्न कुंडली में लग्न भाव में गुरु 29अंश और राहु 20 अंश से हैं तो वो दोनों चलित में अगले भाव में यानी दूसरे भाव धन भाव में चले जायेंगे और गुरु राहु का फल उस भाव के लिए मिलेगा।

लेकिन सिर्फ उस भाव का फल देगा, राशि वो ही रहेगी, वो नहीं बदलेगी। और ना तो वो ग्रहों की दृस्टि बदलेगी, वो तो लग्न कुंडली के मुताबिक ही रहेगी।

मानो की किसी की कुंडली में नौ ग्रहों में से पांच ग्रह चलित में आगे या पीछे के भाव में चले जाते हैं, तो सिर्फ लग्न कुंडली से किया गया फलादेश सही नहीं होगा।

आजकल हम देखतें हैं कि टीवी पर ऑनलाइन ज्योतिष लेपटॉप लेके बैठे होते हैं। किसी का फोन आया तो तुरंत लेपटॉप में कुंडली निकालकर दो मिनिट में फक्त लग्न कुंडली पर नज़र डालके उत्तर दे देते हैं। ना तो चलित देखते हैं, ना तो नवमांश देखते हैं। कहाँ से सही फलित होगा? लेकिन उन लोगों की दुकान भी जोरों से चलती हैं।

आशा रखता हूँ कि आप मेरे उत्तर से संतुष्ट हुए होंगे।

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