जानिए क्या होती हैं राशियां और ज्योतिष शास्त्र में इनका महत्व

12 राशियों की आकृति के आधार पर हर एक राशि का नाम दिया गया है। सभी 12 राशियों के नाम और गुण के अनुसार ही इसका अलग-अलग महत्व होता है।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र का संपूर्ण आधार और भविष्यवाणी राशियां, ग्रहों, नक्षत्रों और भावों में समाहित होता है। ज्योतिष शास्त्र की पाठशाला में हम आज आपको राशियां क्या होती है, राशियों की गणना कैसे की जाती है, राशियों के नाम, प्रकार, गुण और जातक की कुंडली में राशि का क्या आधार है इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।


राशियां क्या होती है ?

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुल 12 राशियां हैं। अब आपके मन में एक सवाल उठ रहा होगा कि राशियों की संख्या 12 ही क्यों है, तो इसका जवाब है कि पृथ्वी से आकाश मंडल को देखने पर यह 360 अंश का एक गोला प्रतीत होता है जिसे भचक्र कहते हैं। हिंदू ज्योतिष का मुख्य आधार यही भचक्र है। इस 360 अंश के भचक्र को 30-30 अंश के बराबर भागों में बाटें तो 12 भाग ही भचक्र की राशियां हैं। 30 अंश को 12 से गुणा करने पर 360 अंश प्राप्त होते हैं। भचक्र का कुल मान 360 अंश होता है। इस तरह से हर एक भाग का मान 30 अंश होता है। इसे ही राशि कहते हैं। भचक्र को 12 राशियों और 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। 

12 राशियों का नाम

वैदिक ज्योतिष में 12 राशियां होती हैं। जिसमें हर एक राशि का अपना स्वभाव, खास निशान, विशेषता और महत्व होता है। इन 12 राशियों की आकृति के आधार पर हर एक राशि का नाम दिया गया है। सभी 12 राशियों के नाम और गुण के अनुसार ही इसका अलग-अलग महत्व होता है। पहली मेष राशि, दूसरी वृषभ राशि, तीसरी मिथुन राशि, चौथी कर्क राशि, पांचवी सिंह राशि, छठी कन्या राशि, सातवीं तुला राशि, आठवीं वृश्चिक राशि, नौंवी धनु राशि, दसवीं मकर, ग्यारहवीं कुंभ और बारहवीं मीन राशि होती है। आपको बता दें इन 12 राशियों का क्रम हमेशा यही होता है।

12 राशियों के स्वामी ग्रह

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन 12 राशियों को नियंत्रित करने इनके स्वामी ग्रहों का निर्धारण किया गया है। जैसे कि हम जानते हैं कि कुल 9 ग्रह होते हैं। ये 9 ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु। इसमें राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है क्योंकि इसका कोई आस्तित्व नहीं होता है। सूर्य और चंद्रमा को एक-एक राशि का स्वामित्व प्राप्त है जबकि मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि को दो-दो राशियों के स्वामी हैं। राहु-केतु एक छाया ग्रह होने के नाते इन्हे किसी भी राशि का स्वामी नहीं माना गया है। सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं। चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी हैं। बुध मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। गुरु धनु और मीन राशि स्वामी हैं। शुक्र वृषभ और तुला राशि के स्वामी ग्रह हैं। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी माने गए हैं।

ज्योतिष में राशियों का महत्व

सभी 12 राशियां ज्योतिष शास्त्र की मुख्य आधार बिंदु होती है। इन राशियों के बिना ज्योतिष शास्त्र की कल्पना नहीं की जा सकती है। किसी जातक का संपूर्ण जीवन इन राशियों के इर्द-गिर्द ही घूमता है। कुंडली में राशियों की स्थिति के आधार पर ही जातक की जन्म राशि, राशि स्वामी,ग्रह स्वामी की गणना करके ही जातक के भूत, वर्तमान और भविष्य के बार में आकलन किया जाता है। राशियों के गुण, स्वभाव और स्थिति के आधार पर ही ज्योतिष गणना का सटीक फलादेश संभव होता है।

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